ये रोटी क़ब्ज़ से लेकर बवासीर, ज़ुकाम, रूसी और पौरुष शक्ति तक करती है ज़बरदस्त फ़ायदे, ये रोटी इस तरह बनाई जाती है

चना शरीर में ताकत लाने वाला और भोजन में रुचि पैदा करने वाला होता है। सूखे भुने हुए चने बहुत रूक्ष और वात तथा कुष्ठ को नष्ट करने वाले होते हैं। उबले हुए चने कोमल, रुचिकारक, पित्त, कमज़ोरी नाशक, शीतल, कषैले, वातकारक, ग्राही, हल्के, कफ तथा पित्त नाशक होते हैं।
चना शरीर को चुस्त-दुरुस्त करता है। खून में जोश पैदा करता है। यकृत (जिगर) और प्लीहा के लिए लाभकारी होता है। तबियत को नर्म करता है। खून को साफ करता है। धातु को बढ़ाता है। आवाज को साफ करता है। रक्त सम्बन्धी बीमारियों और वादी में लाभदायक होता है। इसके सेवन से पेशाब खुलकर आता है। इसको पानी में भिगोकर चबाने से शरीर में ताकत आती है।Image result for चने की रोटी
चना विशेषकर किशोरों, जवानों तथा शारीरिक मेहनत करने वालों के लिए पौष्टिक नाश्ता होता है। इसके लिए 25 ग्राम देशी काले चने लेकर अच्छी तरह से साफ कर लें। मोटे पुष्ट चने को लेकर साफ-सुथरे, कीडे़ या डंक लगे व टूटे चने निकालकर फेंक देते हैं।
चने की रोटी बनाने की विधि :
चने की रोटी बहुत ही स्वादिष्ट होती है। छिलके सहित चने को पीसकर आटा बनाकर रोटी तैयार की जा सकती है। यदि इस आटे में थोड़ा सा गेहूं का आटा मिला दें तो यह मिस्सी रोटी कहलाती है। इसे पानी की सहायता से गूंथकर 3 घंटे बाद दुबारा गूंथकर रोटी बनाएं।Image result for चने की रोटी
यह रोटी त्वचा सम्बंधी रोगों जैसे- खुजली, दाद, खाज, एक्जिमा में बहुत फायदेमंद है, इसमें सब्जी का रस मिला देने से यह और भी गुणकारी हो जाती है।बच्चों को मंहगे बादामों के बजाय काले चने खिलाने चाहिए जिससे वे अधिक स्वस्थ रहेंगे। जहां एक अण्डे में 1 ग्राम प्रोटीन और 30 कैलोरी उष्मा की प्राप्ति होती है, वहां इस मूल्य के काले चने में 41 ग्राम प्रोटीन और 864 कैलारी उष्मा प्राप्त होती है।Image result for चने की रोटी
चने की रोटी के 5 अद्भुत फ़ायदे :
जुकाम : 50 ग्राम भुने हुए चनों को एक कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। इस पोटली को हल्का सा गर्म करके नाक पर लगाकर सूंघने से बंद नाक खुल जाती है और सांस लेने में परेशानी नहीं होती है। गर्म-गर्म चने को किसी रूमाल में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है। चने को पानी में उबालकर इसके पानी को पी जायें और चने को खा लें। चने में स्वाद के लिए कालीमिर्च और थोड़ा-सा नमक डाल लें। चने का सेवन करना जुकाम में बहुत लाभ करता है।खूनी बवासीर : सेंके हुए गर्म-गर्म चने खाने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है।Image result for चने की रोटी
पौरुष शक्ति : 1 मुट्ठी सेंके हुए चने या भीगे हुए चने और 5 बादाम खाकर दूध पीने से पौरुष शक्ति बढ़ती है, जिससे वैवाहिक जीवन ख़ुशियों से भर जाता है।कब्ज : 1 या 2 मुट्ठी चनों को धोकर रात को भिगो दें। सुबह जीरा और सोंठ को पीसकर चनों पर डालकर खाएं। घंटे भर बाद चने भिगोये हुए पानी को भी पीने से कब्ज दूर होती है। अंकुरित चना, अंजीर और शहद को मिलाकर या गेहूं के आटे में चने को मिलाकर इसकी रोटी खाने से कब्ज मिट जाती हैं। रात को लगभग 50 ग्राम चने भिगो दें। सुबह इन चनों को जीरा तथा नमक के साथ खाने से कब्ज दूर हो जाती है।रूसी : 4 बड़े चम्मच चने का बेसन एक बड़े गिलास पानी में घोलकर बालों पर लगायें। इसके बाद सिर को धो लें। इससे सिर की फरास या रूसी दूर हो जाती है।

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सुबह खाली पेट इन बीजों का पानी पीने से पेट की चर्बी मक्खन की तरह पिघल जाएगी, ज़रूर अपनाएँ और शेयर करे

नमस्कार दोस्तों एकबार फिर से आपका All Ayurvedic में स्वागत है आज हम आपको जौ और जौ के पानी के फ़ायदों के बारे में बताएँगे। जौ एक किस्म का अनाज होता है जो देखने में गेंहू की तरह लगता है। जौ गेहूं की अपेक्षा हल्का होता है। जौ में लैक्टिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड, फॉस्फोरिक एसिड, पोटैशियम और कैल्शियम होता है। अगर आपके पेट और उसके आसपास अधिक चर्बी जमा हो गई हो तो जौ के पानी का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसको पीने से आपकी पेट की चर्बी कम होने लगती है। इस लेख में विस्‍तार से जानिये, यह चर्बी कैसे कम करता है।Image result for जौ के पानी
जौ की रोटी का इस्तेमाल अक्सर डायबिटिज मरीजो के लिए बेहतर माना जाता है। उनके शरीर के लिए यह बहुत ही फायदेमंद होता है। इस तरह की बीमारियों के अलावा और भी कई तरह की बीमारियां है जिसमे यह हमारे शरीर को बहुत फायदा करता है। और हमारे शरीर मे उन बीमारियो से लड़ने की क्षमता पैदा करता है। जौ में भरपूर मात्रा में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, सेलेनियम, जिंक, कॉपर, प्रोटीन, अमीनो एसिड, डायट्री फाइबर्स सहित कई तरह के एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो कि हमारी सेहत को काफी फायदा पहुंचाते है। इसका इस्तेमाल हम अनाज के रुप मे तो करते है हि साथ ही अगर इसका इस्तेमाल पानी के साथ किया जाएं तो यह हमारे शरीर मे बहुत फायदा पहुंचाता है। यह कई बीमारियों से निजात दिलाने मे हमारी सहायता करता है।Image result for जौ के पानी
जौ के पानी को तैयार की विधि :
इसके लिए आप कुछ मात्रा में जौ लगभग (100-250 ग्राम) ले लीजिए और उसे अच्छी तरह साफ कर लीजिए उसके बाद इसे करीब चार घंटे तक पानी में भिंगोकर छोड़ दीजिए। फिर इस पानी को तीन से चार कप पानी में मिलाकर धीमी आंच में कम से कम 45 मिनट तक उबाले। इसके बाद गैस बंद कर दें और इसे ठंडा होने दे। जब यह ठंडा हो जाएं तो इसे एक बोतल में भरकर इसके पानी को पीने के लिये इस्तेमाल में लेवे, ये एक दिन का प्रयोग है यही प्रक्रिया रोजाना करे लाभ होगा। मोटापे से ग्रसित लोग कृपया जंक फूड को त्याग दे।Image result for जौ के पानी
जौ को अनाज के रुप मे खाने के साथ-साथ इसके पानी पीने के और क्या-क्या है फायदें :
1. मोटापा, पेट और कमर की चर्बी घटाए :वजन सबंधी परेशानी मे यह बहुत ही उपयोगी होता है। इसमें ऐसे तत्व पाएं जाते है। जिसका सेवन करने से मेटाबॉलिज्म बढ़ते है। जौ मोटापे को कम करने मे उपयोगी होता है जिससे आप स्लिम नजर आ सकते है। कैसे कम करता है मोटापा : जौ घुलनशील और अघुलनशील फाइबर का स्रोत होता है। इस गुण के कारण आपको देर तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। दो लीटर पानी में दो बड़े चम्मच जौ डालकर उबालें। उबालने के वक्त ढक्कन को अच्छी तरह से लगा दें ताकि जौ के दाने अच्छी तरह से पक जायें। जब यह मिश्रण पानी के साथ घुलकर हल्के गुलाबी रंग का पारदर्शी मिश्रण बन जायें तो समझ जाना चाहिए कि यह पीने के लिए तैयार है, इसको छानकर रोज इसका सेवन करें। इसमें नींबू, शहद और नमक भी डाल सकते हैं। छिलके वाले में ज्यादा फाइबर होता है और पकाने में ज्यादा समय लगता है इसलिए बिना छिलके वाले पकाने में आसान हैं। और जौ-चने के आटे की चपाती के सेवन से भी पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।2. यूरीनरी इंफेक्‍शन, डीहाइड्रेशन, शरीर के विषाक्त पदार्थ :इस मिश्रण (बिंदु क्रमांक 1 में बताया गया मिश्रण) को पीने से पेट की चर्बी तो कम होगी साथ ही डीहाइड्रेशन की समस्‍या भी नहीं होगी। यह यूरीनरी इंफेक्‍शन के उपचार में भी मददगार है। यह कब्ज़ को दूर करने के साथ-साथ अमा दोष (आयुर्वेद के अनुसार पेट के विषाक्त अवांछित पदार्थ) से भी राहत दिलाता है। इस अनाज में मूत्रवर्द्धक (diuretic) गुण होता है जो विषाक्त पदार्थों के साथ शरीर के अतिरिक्त पानी को भी निकाल देता है।Image result for जौ के पानी
3. ह्रदय की बीमारीयो में :इसमें पाया जाने वाले तत्व कोलेस्ट्राल के लेवल को ठीक रहता है। जिसके कारण आपको दिल संबंधी किसी भी तरह की बीमारी नहीं होगी। दिल की बीमारी होने का मुख्य कारण कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होना होता है।4. इम्यूनिटी सिस्टम बनाए मजबूत :इसमें ऐसे तत्व पाए जाते है। जो कि आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकाल देता है। जिससे कि आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत हो जाता है। साथ ही आपकी स्किन में निखार भी आता है। 5. पेट मे जलन :गर्मियों के मौसम में इसे पीने से ठंड़क मिलती है। अगर आपने तेज मसालेदार खाना खाया है जिसके कारण आपको पेट में जलन हो रही हो तो इसे दूर करने के लिए आप जौ के पानी का सेवन करे जिससे आपकी पेट की जलन मे काफी फायदा करता है।6. पैरों की सूजन :गर्भावस्था के दौरान महिला के पैरों में होने वाली सूजन को कम करता है। और उनके पैरो की सूजन से सबंधी परेशानी को दूर करता है।7. यूरीन की समस्या :अगर आपको यूरिन संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या है, तो जौ के पानी का सेवन करना काफी फायदेमंद साबित होता है। यह आपकी यूरीन सबंधी प्रोब्लम को दूर रखता है।

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इससे ज़िद्दी से ज़िद्दी और पुरानी से पुरानी क़ब्ज़ जड़ से ख़त्म हो जाती है, सुबह पेट ऐसा साफ़ होगा की कोना-कोना चकाचक हो जाएगा

क़ब्ज़ क्या है ?

कब्ज से मतलब है, कि मल-त्याग न होना, मल-त्याग कम होना, मल में गांठें निकलना, लगातार पेट साफ न होना, रोजाना टट्टी नहीं जाना, भोजन पचने के बाद पैदा मल पूर्ण रूप से साफ न होना, मल त्यागने के बाद पेट हल्का और साफ न होना आदि को कब्ज कहते हैं।
कब्ज की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है यह छोटे से लेकर बड़े तक किसी को भी और कभी भी हो सकती है कब्ज एक ऐसी समस्या है अगर इससे छुटकारा नहीं पाया गया तो बहुत पेट में दर्द होता है तकलीफ होती है और यह असहनीय दर्द भी हो जाता है। कब्ज का इलाज आज हम आपको बताएंगे कि कब्ज का इलाज कैसे करें कब्ज एक आम समस्या बन गई है यह हर व्यक्ति को परेशान करती है जब किसी व्यक्ति का खाना पूरी तरह से पच नहीं पाता है तो उसे गैस की समस्या हो जाती है और गैस की समस्या होने पर ही कब्ज़ा का होना संभव होता है।Image result for कब्ज
क़ब्ज़ होने के कारण :
खानपान सम्बंधी गलत आदतें जैसे- समय पर भोजन न करना, बासी और अधिक चिकनाई वाला भोजन, मैदा आदि से बनाया गया मांसाहारी भोजन, भोजन में फाइबर की कमी, अधिक भारी भोजन अधिक खाना, शौच को रोकने की आदत, शारीरिक श्रम न करना, विश्राम की कमी, मानसिक तनाव (टेंशन), आंतों का कमजोर होना, पानी की कमी, गंदगी में रहना, मादक द्रव्यों का सेवन, एलोपैथी दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण, भोजन के साथ अधिक पानी पीने, मिर्च-मसालेदार तथा तले हुए पदार्थ जैसे-पूरी-कचौड़ी, नमकीन, चाट-पकौड़े खाने, अधिक गुस्सा, दु:ख आलस्य आदि कारणों से कब्ज हो जाती है।Image result for कब्ज
कब्ज के कुछ और भी कारण होते हैं जैसे कि हमारा खाने का सही ढंग से ना पचना खाना खाने के बाद बैठ जाना हल्का ना टहलना आदि कारण हो सकते हैं कब्ज को दूर करने के लिए हम यहां पर कुछ उपाय बता रहे हैं जिनको प्रयोग करके आप अपनी कब्ज को दूर कर सकते हैं।क़ब्ज़ और पेट संबंधी समस्याओं के लिए चमत्कारी और सबसे उत्तम चूर्ण तैयार करना :एक किलो छोटी हरड़ लेकर उसे छाछ में भिगो दें 24 घण्टे बाद हरड़ को छाछ से निकालकर सूखा ले और पीसकर पाउडर बना ले। शाम को सोते समय 4 ग्राम की मात्रा में घड़े (मिट्टी का मटका) के पानी के साथ ले। ये कठिन से कठिन और पुरानी से पुरानी क़ब्ज़ तथा पेट के सभी रोगों के लिए सबसे उत्तम औषधि है ।अगर थोड़ी मेहनत और कर सके तो हरड़ के पाउडर को अरंडी के तेल में हल्का सा भून लें तो ये दुगना गुणकारी पाउडर तैयार हो जाएगा।जिनको ज्यादा कब्ज की समस्या रहती है वो तली हुई चीजें गरिष्ठ भोजन ना ले । ज्यादा फाइबर वाली चीजें प्रयोग करे आटा पिसवाते समय कनक में 2-4 किलो चने मिक्स करके पिसवाएं । पेट की समस्याओं से हमेशा बचे रहेंगे ।Image result for कब्ज
क़ब्ज़ से बचने के लिए कैसा भोजन करे :

दालों में मूंग और मसूर की दालें, सब्जियों में कम से कम मिर्च-मसालें डालकर परवल, तोरई, टिण्डा, लौकी, आलू, शलजम, पालक और मेथी आदि को खा सकते हैं। आधे से ज्यादा चोकर मिलाकर गेहूं तथा जौ की रोटी खाएं। भूख से एक रोटी कम खाएं।
अमरूद, आम, आंवला, अंगूर, अंजीर, आलूचा, किशमिश, खूबानी और आलूबुखारा, चकोतरा और संतरे, खरबूजा, खीरा, टमाटर, नींबू, बंदगोभी, गाजर, पपीता, जामुन, नाशपाती, नींबू, बेल, मुसम्मी, सेब आदि फलों का सेवन करें।Image result for कब्ज
दिन भर में 6-7 गिलास पानी अवश्य पीयें। मूंग की दाल की खिचड़ी खायें। फाइबर से बने खाने की चीजें का अधिक मात्रा में सेवन करें, जैसे- फजियां, ब्रैन (गेहूं, चावल और जई आदि का छिलका), पत्ते वाली सब्जियां, अगार, कुटी हुई जई, चाइनाग्रास और ईसबगोल आदि को कब्ज से परेशान रोगी को खाने में देना चाहिए।
क़ब्ज़ में परहेज़ :तले पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, चावल, कठोर पदार्थ, खटाई, रबड़ी, मलाई, पेड़े आदि का सेवन न करें। कब्ज दूर करने के लिए हल्के व्यायाम और टहलने की क्रिया भी करें। पेस्ट्रियां, केक और मिठाइयां कम मात्रा में खानी चाहिए।

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मौत को छोड़ कर सभी रोगों को जड़ से खत्म कर देती है यह चीज

दक्षिण भारत में साल भर फली देने वाले पेड़ होते है. इसे सांबर में डाला जाता है . वहीँ उत्तर भारत में यह साल में एक बार ही फली देता है. सर्दियां जाने के बाद इसके फूलों की भी सब्जी बना कर खाई जाती है. फिर इसकी नर्म फलियों की सब्जी बनाई जाती है. इसके बाद इसके पेड़ों की छटाई कर दी जाती है.Image result for सहजन
– आयुर्वेद में ३०० रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसकी फली, हरी पत्तियों व सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।– इसके फूल उदर रोगों व कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, शियाटिका,गठिया आदि में उपयोगी है|– जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग शियाटिका ,गठिया, यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है|– सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है|– सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात, व कफ रोग शांत हो जाते है| इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया,शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है| शियाटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है,– मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है |Image result for सहजन
– सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व 72 प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है|– इसकी सब्जी खाने से पुराने गठिया , जोड़ों के दर्द, वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है.– सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है.– सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है.– इसकी जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पिने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है.– इसके पत्तों का रस बच्चों के पेट के किडें निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है.– इसका रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है.– इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है.– इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है.– इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है.Image result for सहजन
– इसकी जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है.– इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है.– सर दर्द में इसके पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे.– इसमें दूध की तुलना में ४ गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है।– सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है जिससे जीवविज्ञान के नजरिए से मानवीय उपभोग के लिए अधिक योग्य बन जाता है।Image result for सहजन
– कैन्सर व पेट आदि शरीर के आभ्यान्तर में उत्पन्न गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ो में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है।– सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।– आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से विषाणु जनित रोग चेचक के होने का खतरा टल जाता है।– सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिये अति आवश्यक है।Image result for सहजन
– सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शीर के कई रोगों से लड़ता है, खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तो, आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।– इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आइरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है।– इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।– सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।– आप सहजन को सूप के रूप में पी सकते हैं, इससे शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।

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इन लोगों के लिए अदरक है जहर, पढ़कर देखियें कहीं आप भी तो नहीं है शामिल

हेल्दी रहने के लिए आपको विशेष ध्यान रखना चाहिए, लेकिन आजकल की भागदौड़ भऱी हमें कुछ चीजों का ध्यान ही नहीं रहता है। दिन भर मोबाइल, सोशल मीडिया पर बने होने की वजह से हमारे हेल्थ पर बुरा असर होता है। हम कुछ भी खा लेते हैं, जोकि हमारी हेल्थ के लिए नुकसानदायी होता है। आज हम आपको कुछ ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं, जिसकी वजह से आपको बड़ा फायदा होगा। हमारे देश में खानपान का विशेष ध्यान रखा जाता है, ऐसे में हर कोई खानपान का शौकीन होता है। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है?Image result for अदरक

आज हम आपको अदरक से जुड़ी कुछ खास बताने जा रहे हैं, जिससे आपको थोड़ी सी मदद मिल जाएगी। चाय से लेकर सब्जी तो कोई तो खाली अदरक खाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, आयोडीन, क्लोरीन और विटामिन से भरपूर अदरक कई पोषक तत्वों का भंडार है, जोकि हेल्थ के लिए बहुत फायदा करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोगों  को अदरक गलती से भी नहीं खाना चाहिए, क्योंकि उनके लिए यह जहर के समान होता है। आज हम आपको यही बताएंगे कि अदरक किन लोगों के लिए जहर जैसा होता है।

आयुर्वेद में भी अदरक की कई खूबियां बताई गई हैं, लेकिन आपको यह कही नहीं बताया जाता है कि अदरक का कुछ लोगों को परहेज करना चाहिए। दरअसल, हर किसी की बॉडी को जरूरी नहीं है कि एक सी चीजें सूट करें, बल्कि अपने शरीर के बनावट के आधार पर ही आपको चीजीं का सेवन करना चाहिए, ताकि वो आपके लिए फायदेमंद हो सके। तो चलिए जानते हैं कि वो लोग कौन कौन है, जिन्हें अदरक से बचना चाहिए, वरना उनकी हेल्थ पहले से भी खराब हो जाएगी, तो देखते हैं कि इस कड़ी में क्या क्या शामिल है?

इन लोगों को करना चाहिए परहेज

1.जो लोग शरीर से दुबले पतले होते हैं, उन्हें अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि अदरक उनके लिए हानिकारक होता है। दुबले पतले लोगों को अपना वजन बढ़ाने की जरूरत होती है, लेकिन अदरक भूख को कम करती है, जिसकी वजह से उनका वजन बढ़ने की बजाय कम हो जाता है। ऐसे में अगर आप वजन बढ़ाने की सोच रहे हैं, तो अभी से ही अदरक का त्याग कर दें, ताकि आपकी इच्छा पूरी हो सके।

2.हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों को अदरक से कोसो दूर रहना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए अदरक जहर माना जाता है, क्योंकि अदरक खून को पतला करता है और इनके लिए खून का पतला होना मतलब जिंदगी खत्म होने के कगार पर आ जाती है। ऐसे में इन लोगों को दूर रहना चाहिए। इन्हें चाय में भी अदरक डालकर नहीं पीना चाहिए।Image result for अदरक

3.गर्भवती महिलाओं को इससे बचना चाहिए। वैसे तो शुरूआती टाइम में अदरक खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन बाद में आपको इसका परहेज करना चाहिए। यानि 6 महीने के बाद आपको अदरक गलती से नहीं खाना चाहिए। वरना बेबी पर नुकसान हो सकता है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अदरक परहेज करने से चाहिए, इससे दोनों लोग ही सुरक्षित रहेंगे।Image result for अदरक

4.जो लोग रेगुलर दवाईयों का सेवन करते हैं, उन्हें तो अदरक की तरफ देखना भी नहीं चाहिए, क्योंकि बेटा-ब्लॉकर्स, एंटीकोगुलैंट्स और इंसुलिन अदरक के साथ मिलकर खतरनाक मिश्रण बनाते हैं, जोकि आपके लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसे में इन लोगों को अदरक का सेवन करने से बचना चाहिए, ताकि किसी भी तरह का कोई नुकसान न हो।

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जो लोग फ्रिज में गूँथा हुआ आटा रखते हैं, वह इस बात को जरूर जान ले नहीं तो पछताएंगे

दोस्तों आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास बिल्कुल भी समय नहीं है| जिस कारण से अक्सर महिलाएं एक बार में आटे को गुंद कर फ्रिज में रख देती है| उसके बाद उस आटे का धीरे-धीरे उपयोग करती है| इससे वह अपने समय की बचत करती है| ऐसा करना आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है| आज हम आपको इसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं|
वो जमाना कब का बीत चुका है, जब लोग ताज़ी सब्जियाँ रोज़ाना लेकर आते थे और इन्हीं ताज़ी सब्जियों से ही अपना खाना तैयार करते थे। पर वो आजकल तो मानो संभव ही नहीं है, क्योंकि अब हमारे पास फ्रिज है। आज हर एक घर में फ्रिज मौजूद है। इसकी मदद से लोग अतिरिक्त भोजन को कुछ अधिक समय तक सहेजकर रख सकते हैं, क्योंकि फ्रिज आपके भोजन के खराब होकर सड़ने की प्रक्रिया को कुछ दिनों के लिए धीमा कर देता है, जिससे आपका खाना अधिक समय तक ताज़ा रहे। फ्रीज में रखे हुए खाने फल सब्जियों से लेकर अन्य खाद्य पदार्थों को लोग फ्रिज में रखते हैं। आमतौर पर भारतीय महिलाओं की ये आदत होती है, कि वे एक ही वक़्त में 2-3 दिन के लिए आटा गूँध लेती हैं। एक समय के भोजन के लिए जितने भी आटे की ज़रूरत है, उसका इस्तेमाल कर लेती हैं और बचे हुए गूँधे हुए आटे को फ्रिज में रख लेती हैं। लेकिन कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी हैं, जिन्हें हमे फ्रिज में रखने से बचना चाहिए। ऐसी एक खाद्य सामाग्री है, गूँधा हुआ आटा। आइए जानते हैं, इस लेख के जरिये कि क्यों हमे फ्रिज में गूँधा हुआ आटा नहीं रखना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार गूँथा हुआ आटा फ्रिज में क्यों नही रखना चाहिये :
आटे को बंद कर जब फ्रिज में रखा जाता है| तो उसमें मौजूद बैक्टीरिया चिपक जाते है| साथ ही उसमें फफूंदी भी उत्पन्न हो सकते हैं| जिसकी वजह से आपके स्वास्थ्य को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है|अगर फ्रिज में रखे आटे में हल्का सा भी खट्टापन आ जाए| तो उस आटे का उपयोग बिल्कुल ना करें| अगर आप इसकी रोटियां बना कर खाते हैं| तो आपको फूड पाइज़निंग हो सकता है|कई महिलाएं एक साथ बहुत सारे आटे को गुंद कर फ्रिज में रख देती है| और उसका धीरे धीरे उपयोग करती है| इससे आटे का पोषक तत्व तो नष्ट होता ही है| साथ ही गूदे हुए आटे में कई तरह के बैक्टीरिया पनपने लगते हैं| जिसकी रोटियां बनाकर खाने से शरीर में कई तरह की बीमारियां होने लगती है|

वैसे हमे लगता है अक्सर गृहणियों की आदात होती है कि वह आटा बच जाने पर उसे फ्रिज में रख देती है ताकि बाद में उपयोग कर सके. कभी कभी तो आटा गलती से बच जाता है लेकिन कुछ लोग तो इतने आलसी होते है कि दिन में दो बार आटा ना गूंथना पड़े तो ढेर सार आटा गूंथ कर फ्रिज में पटक देते है. लेकिन क्या एस करना सेहत मंद होता है? विशेषज्ञों कि माने तो आटा भिगोते ही तुरंत इस्तेमाल करना चाहिए वरना उसमे ऐसे रासायनिक बदलाव आते है जो सेहत के लिए बहुत हानिकारक हो सकते है. ऐसा आयुर्वेद में भी स्पष्ट कहा गया है . इसलिए फ्रिज का इस्तेमाल आटा रखने के लिए ना करे. कुछ ही दिन में ऐसी आदत बन जायेगी की जितनी रोटियाँ लगती है उतना ही आटा भिगोया जाए और इसमें ज़्यादा समय भी नहीं लगता. ताज़े आटे की रोटियाँ ज़्यादा स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है और आपकी सेहत पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ता. अगर आटा खमीरा हो जाए ओर जयादा पुराना हो तो उसे न खाए।

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार फ्रीज मेंं गूँथा हुआ आटा क्यों नही रखना चाहिये :
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार फ्रीज में रखा आटा भूत-प्रेत को बुलाता है| अगर आप फ्रीज में आटा रखते हैं तो मृतात्मा आपके घर आ सकती है फ्रीज में गूंथा आटा आपका समय तो बचा सकता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके घर में भूत-प्रेत को निमंत्रित करता है। फ्रीज में गूंथा आटा उस पिंड के समान माना गया है जो पिंड मृत्यु के बाद मृतात्मा के लिए रखे जाते हैं।घर में गूंथा हुआ आटा फ्रीज में रखने की वृत्ति बन जाती है तब भूत इस पिंड का भक्षण करने के लिए घर में आने शुरू हो जाते हैं जो मृत्यु के बाद पिंड पाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे भूत और प्रेत फ्रीज में रखे इस पिंड से तृप्ति पाने का उपक्रम करते हैं।जिन परिवारों में भी इस प्रकार की आदत है वहां किसी न किसी प्रकार के अनिष्ट, रोग-शोक और क्रोध तथा आलस्य का डेरा होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि बासी भोजन भूत भोजन होता है और इसे ग्रहण करने वाला व्यक्ति जीवन में रोग और परेशानियों से घिरा रहता है।

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घर में उग आया है ये पौधा तो इसे भूलकर भी ना उखाड़ें , अमृत के समान ये औषधि

चौलाई का पौधा घर में आसानी से उग जाता है। कई बार इसे बेकार समझकर लोग उखाड़ देते हैं। ऐसे भी कई लोग हैं जो इसे खाना पसंद नहीं करते। जबकि सच तो यह है कि आयुर्वेद में चौलाई को अमृत के समान औषधि माना जाता है। सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंस, नई दिल्ली के डॉ. मुकेश चिंचोलिकरबता रहे हैं चौलाई खाने के फायदे।Image result for चौलाई का पौधा
कैसे बनाएं चौलाई?
-चौलाई की सब्जी कम तेल में बनाएं।
-चौलाई के पत्तों को दालों में मिलाकर बनाएं।
-इसे आलू के साथ मिलाकर आलू भुजिया बना सकते हैं।
-इसे बैंगन के साथ मिलाकर भी बना सकते हैं।
चौलाई खाने के 5 फायदे :Image result for चौलाई का पौधा

चौलाई किडनी स्टोन दूर करती है। इसे खाने से किडनी स्टोन निकल जाता है। जिन लोगों को किडनी प्रॉब्लम है, उन्हें चौलाई खाने से फायदा होगा। अगर कुछ दिन तक रोज चौलाई खाएं तो किडनी स्टोन गल जाता है।चौलाई कैंसर से बचाती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह कैंसर सेल्स को बनने से रोकती हैं। चौलाई अगर सब्जी के रूप में पसंद न हो तो इसे पीसकर जूस बना सकते हैं।Image result for चौलाई का पौधा
चौलाई दिल की बीमारियों से बचाती है। इससे कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल होता है। जिन लोगों का BP हाई होता है, उन्हें चौलाई खाने से फायदा होगा। ​
चौलाई खाने से डाइजेशन ठीक रहता है। कब्ज जैसी प्रॉब्लम दूर होती है। अगर चौलाई का टेस्ट पसंद न हो तो इसे पालक या मेथी के साथ मिक्स करके बना सकते हैं।

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खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना ज़हर के समान है, क्योंकि इससे बनता है यूरिक एसिड और ख़राब कोलेस्ट्रॉल, जरूर पढ़े काम की पोस्ट है

➡ खाना खाने के बाद पानी पीना ज़हर समान :
खाने के साथ पानी अमृत है या ज़हर अच्छे स्वस्थ्य के लिए ये जानना बहुत जरुरी है.! हमारा खाना सही पच रहा है या नहीं? और ऐसा क्या कारण है के हम खाना खाने के बाद पानी क्यों ना पीये ? ये आपकी अनेक बीमारियो का कारण भी हो सकता हैं और अनेक बीमारियो का हल भी।
➡ आइये जानते हैं इसी राज़ को :Image result for खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना ज़हर

हमने दाल खाई, हमने सब्जी खाई, हमने रोटी खाई, हमने दही खाया, लस्सी पी, दूध, दही, छाछ, लस्सी, फल आदि.! ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया, ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है.! पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है, जिसको हम हिंदी मे कहते है “ अमाशय ” | उसी स्थान का संस्कृत नाम है “ जठर ” | उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है “ epigastrium ”, ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है। ये बहुत छोटा सा स्थान हैं, इसमें अधिक से अधिक 350gms खाना आ सकता है.! हम कुछ भी खाते, सब ये अमाशय मे आ जाता है.! आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है | उसी को कहते हे “जठराग्न”.! ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है । ऐसे ही पेट मे होता है जेसे ही आपने खाना खाया कि जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी..|Image result for खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना ज़हर यह ऑटोमेटिक है, जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला कि इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई.! ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना’ पचता है | अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया | और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है.! अब जो आग (जठराग्नि) जल रही थी, वो बुझ गयी.! आग अगर बुझ गयी, तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी.!
अब हमेशा याद रखें खाना जाने पर हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है, एक क्रिया है जिसको हम कहते हैं “ Digestion ” और दूसरी है“fermentation ” फर्मेंटेशन का मतलब है सडना…! और डायजेशन का मतलब है पचना.! आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा, तो उससे रस बनेगा.! जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा.! ये तभी होगा जब खाना पचेगा.! यह सब हमें चाहिए. ये तो हुई खाना पचने की बात |Image result for खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना ज़हर
➡ अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा ?
खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड (uric acid) | कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है कि मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है, मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ, वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो| और एक दूसरा उदाहरण खाना जब खाना सड़ता है, तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते है LDL (Low Density lipoprotine) माने खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterol).जब आप ब्लड प्रेशर (BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP) हाई-बीपी है आप पूछोगे… कारण बताओ.? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है | आप ज्यादा पूछोगे कि कोलेस्ट्रोल कौन सा बहुत है ? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है | इससे भी ज्यादा खतरनाक एक विष है वो है…. VLDL (Very Low Density Lipoprotive) ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है। अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता|Image result for खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना ज़हर
खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides.! जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका “triglycerides” बढ़ा हुआ है तो समझ लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है। तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे, कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे, कोई LDL -VLDL के नाम से कहे तो समझ लीजिए कि ये विष है और ऐसे विष 103 है | ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है | मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है , कोई कहता है मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप…! कि आपका खाना पच नहीं रहा है | कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे कि खाना पच नहीं रहा है |Image result for खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना ज़हर क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता.! खाना पचने पर जो बनता वो है…. मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र, अस्थि.! और खाना नहीं पचने पर बनता है…. यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल, LDL-VLDL.! और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है.! पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप Heart Attack कहते हैं.
तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है कि जो हम खा रहे हैं वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचना चाहिए इसके लिए पेट मे ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए| क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं है और खाना पकता भी नहीं है| महत्व की बात खाने को खाना नहीं, खाने को पचाना है |

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आंवला और शहद कर देंगे आपको एनर्जी से ओत प्रोत, दिनभर रहोगे एक्टिवेट मोड में इन 10 फायदों से

आयुर्वेद अनुसार कुछ प्रयोग ऐसे हैं की जिनसे नवजीवन समान प्रभाव पड़ता है कुछ ऐसा ही प्रयोग है इन आंवलो और शहद का। जिसके इस्तमाल से आपका शरीर एक दम फिट और उर्जा से ओत प्रोत हो जायेगा। अगर आप आंवला और शहद के प्रयोग की है अगर आप भी भरपूर फायदा उठाना चाहते हो तो निम्नलिखित विधि को पढ़े और इस्तमाल करें।Image result for आंवला और शहद
➡ बनाने की विधि और सेवन का तरीका :
हरे आंवलों को कुचलकर या कद्दुकस कर कपड़े से छानकर आंवलों का रस निकाल लें। ततपश्चात 15 ग्राम (तीन छोटे चम्मच) हरे आंवलों के रस में 15 ग्राम शहद मिलाकर प्रात: व्यायाम के बाद पी लें। इसके पश्चात दो घंटे तक कुछ न लें। हरे आंवलों के मौसम में निरंतर डेढ़-दो मास इसे लेते रहने से काया पलट जाती है। सभी रोगो से बचे रहने के इच्छुक लोंगो के लिए यह एक श्रेष्ठ योग है और कायाकल्प के समकक्ष है।Image result for आंवला और शहद
➡ आंवला और शहद के 10 अद्भुत फायदे :इसके सेवन से शारीरिक कमजोरी नष्ट होती है। कमजोरी को नष्ट करने वाली इसके बराबर शायद ही कोई दूसरी ओषधि हो।इससे आमाशय को बल मिलता है और शरीर में नए रक्त का निर्माण होता है।सवन-काल में ब्र्म्ह्चर्य पालन करें और तेल, मिर्च, खटाई, गरिष्ट और तले पदार्थो से परहेज करें।Image result for आंवला और शहद
सोम रोग की शिकार महिलाएं जिनकी पेशाब रोकने की क्षमता के क्षय हो जाने से चेहरा बिलकुल निस्तेज हो गया हो और मूत्रस्त्रव बहुत अधिक होता हो, इस प्रयोग से उनका सोम रोग नष्ट होकर सौंदर्य लूट आता है।मासिक धर्म की अवधि में अमियमित्ता और मासिक धर्म की गड़बड़ियों में डॉकटरो के पास भागने से पहले आज इसे आजमा कर देंखे तो नब्बे प्रतिशत मामलों में यह प्रयोग प्रणाली को स्वाभिक दशा में ले आता है।सिरदर्द, नेत्ररोग आदि अनेकानेक रोगो से छुटकारा प्राप्त होकर नवजीवन प्राप्त होता है।उपरोक्त प्रयोग के साथ यदि आंवलों या त्रिफला जल से आँखों को धोते रहने से मोतियाबिंद को आराम मिलता है।Image result for आंवला और शहद
ताजे आंवले को चबाने से मुख की गर्मी शांत होती है, आँखे स्वस्थ रहती है, कब्ज दूर रहती है, दिल और दिमाग की शक्ति बढ़ती है व चेहरे पर नई रौनक आती है। एक ताजा आंवले में नारंगी की अपेक्षा बीस गुना विटामिन ‘सी’ होता है।महर्षि चरक का मत है की जगत में जितनी भी रसायन औषधियां है उन सबमे आंवला उत्कृष्ट है, क्योंकि इसमें जितने रोग निवारक, रक्तशोधक और आरोग्यवर्धक गुण है, उतने किसी अन्य वस्तु में नही।
आँवला चूर्ण 5-10 ग्राम एक चम्मच शहद में मिलाकर सुबह खाली पेट चाटने से थाइरोइड जैसी गंभीर बीमारी भी 1-2 महीने में घुटने टेक देती है।
अधिक जानकारी के लिए यह 👇👇👇 वीडियो देखें

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उम्र के साथ-साथ घुटने घिसने लगे है, घुटनो में टक-टक की आवाज़ आती है, बैठ जाते हो तो उठ नही पाते, इन सभी के लिए अचूक और कारगर देशी उपाय

➡ घुटनो का दर्द (Knee Pain) :
आज के बदलते परिवेश में खान-पान में भी कुछ न कुछ बदलाव आरहा है, क्योंकि आज वो पुराने जमाने के बिना मिलावटी शुद्ध खाद्य सामग्री नही रही। यही कारण है कि आज के इस आधुनिक और वैज्ञानिक युग मे भी बीमारियों का अंबार खड़ा है, इसमे से एक है घुटने का दर्द। हमने कई बार अपने बड़े बुजर्गो को घुटनों के दर्द से तडपते हुए देखा है। दिन रात दवाई खाने से भी उन्हें कोई आराम नही मिलता है चलने फिरने में बहुत परेशानी होती है और साथ ही घुटनों को मोड़ने में, उठने – बैठने में भी दिक्कत आती है। कभी कभी उन्हें इतना ज्यादा दर्द होता की वो ठीक ढंग से सो भी नहीं पाते और उनके घुटनों में सुजन तक भी आ जाती है। उम्र के साथ-साथ घुटने घिसने लगे है, घुटनो में टक-टक की आवाज़ आती है, बैठ जाते हो तो उठ नही पाते क्यूँकि उम्र के साथ हड्डियों की बीमारी बढती जाती है। आज हम घुटनों के दर्द के ऐसे कारगर उपाय बताएंगे जो बहुत असरकारक है अगर इनको अपना लिया तो बुढ़ापे तक किसी सहारे की जरूरत नही पड़ेगी घोड़े की तरह दौड़ पाएंगे तो आइये जानते है इन उपायों के बारे में।Image result for घुटनो का दर्द

➡ घुटनो के दर्द (Knee Pain) के चमत्कारी घरेलू रामबाण उपाय :
हरसिंगार एक पौधा है जिसके सफेद रंग के फूल होते है ये फूल रात को खिलकर सुबह गिर जाते है इस पौधे के 6 से 7 पत्तों को सिल बट्टे पर पीसकर इसकी चटनी बना ले और एक गलास पानी में उबाले। उबलते उबलते जब यह आधा रहा जाये तो इसको गुनगुना करके प्रतिदिन खाली पेट पीये। ऐसा करने से आपके सरीर और जोड़ो के दर्द से आपको मुक्ति मिलेगी। इस औषधि के साथ कोई अन्य दवा नहीं लेनी है। यह उपाय सबसे ज्यादा कारगर और सफल है। कनेर के पत्तों को उबालकर उसको उसके पत्तों की चटनी बना ले और तिल के तेल में मिलाकर घुटनों पर मालिश करे ऐसा करने से आपको दर्द से मुक्ति मिलेगी। आपके घुटनों में दर्द रहता है तो रोज रात को 2 चम्मच मैथी को एक ग्लास पानी में भिगो कर रख दे। और प्रात: काल खाली पेट मेथी को चबा चबा कर खाने से और मेथी का पानी पीने से आपको कभी भी घुटनो का दर्द नही होगा।एक ग्लास दूध में 4-5 लहसुन की कलियाँ डाल कर अच्छी तरह से उबाले और गुनगुना पीने से भी घुटनों के दर्द में आराम मिलता है।हर रोज आधा कच्चा नारियल खाने से बुढ़ापे में भी कभी आपको घुटनों के दर्द का परेशानी नही होगी।
5 अखरोट प्रतिदिन खाली पेट खाने से आपके घुटने में कभी कष्ट नही होगा।Image result for घुटनो का दर्द
रोज रात को सोने से पहले एक ग्लास दूध ने हल्दी डाल कर पीने से आपको हड्डियों में दर्द की समस्या से मुक्ति मिलेगी।एक दाल के दाने के बराबर थोड़ा सा चूना (जो आप पान में लगा कर खाते है) को दही में या पानी में मिला कर पीने से आपको हड्डियों में कभी दर्द नही होगा। चूने के पानी को हमेशा सीधे बैठकर ही पिए इससे आपको जल्दी आराम होगा। यह औषधि सिर्फ 1 महीने पीने से ही शरीर की किसी भी हड्डी में दर्द हो तो वो जल्दी ठीक हो जाएगा।सुबह और शाम को भद्र आसन करने से आपको लाभ मिलेगा।हड्डियों के दर्द से बचने के लिए आप अपने भोजन में 25% फल और सब्जियों को शामिल करेगे तो आपको कभी भी हड्डियों के दर्द का सामना नहीं करना पड़ेगा।नारियल, सेब, संतरे, मौसमी, केले, नाशपति, तरबूज और खरबूजे आदि फलों का सेवन हर रोज जरुर करे।गोभी, सोयाबीन, हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ खीरे, ककड़ी, गाजर, और मेथी को अवश्य शामिल करे।Image result for घुटनो का दर्द
दूध और दूध से बनी चीजे भरपूर मात्रा में खाए और कच्चा पनीर भी भोजन में शामिल करे, ऐसा करने से आपके जोड़ों के दर्द में कमी आएगी।
मोटा अनाज, मकई, बाजरा, चोकर वाले आटे की रोटियों का जरुर उपयोग करे। क्योंकि इनमे वो सभी तत्व होता है जो आपकी हड्डियों और जोड़ो के दर्द से मुक्ति दिलाता है।अगर अत्यधिक सर्दी की वजह से आपके दादा या दादी के घुटनों में बहुत अधिक पीड़ा है तो सरसों के तेल में लहसुन और अजवायन को पकाये और फिर जब यह तेल गुनगुना हो जाये तो घुटनों पर मालिश करे, उनका दर्द छू मंतर हो जायेगा।
अधिक जानकारी के लिए यह वीडियो देखें

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