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औषधि का राजा है पीपल, ये कब्ज, गैस को मिटाता है तो फटी एड़ियों को भरता है, हृदय के लिए किसी वरदान से कम नही

अश्वत्थ यानी पीपल का वृक्ष। यह मात्र वृक्ष नहीं, हमारी संस्कृति और सभ्यता का सजीव प्रतिमान है। वनस्पति विज्ञान और आयुर्वेद के अनुसार भी पीपल का पेड़ कई तरह से फायदेमंद माना गया है। आइए जानते हैं, पीपल के पेड़ के आयुर्वेदिक फायदे।
औषधियों का राजा है पीपल

सांस की तकलीफ
सांस संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या में पीपल का पेड़ आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए पीपल के पेड़ की छाल का अंदरूनी हिस्सा निकालकर सुखा लें। सूखे हुए इस भाग का चूर्ण बनाकर खाने से सांस संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती है। इसके अलावा इसके पत्तों का दूध में उबालकर पीने से भी दमा में लाभ होता है।Image result for सांस की तकलीफ

गैस या कब्ज
पीपल के पत्तों का प्रयोग कब्ज या गैस की समस्या में दवा के तौर पर किया जाता है। इसे पित्तव नाशक भी माना जाता है, इसलिए पेट की समस्याओं में इसका प्रयोग लाभप्रद होता है। इसके ताजे पत्तोंद के रस निकालकर सुबह शाम एक चम्म च पीने से पित्तए के साथ ही समस्याएं भी समाप्त होती हैं।Image result for गैस या कब्ज

दांतों के लिए
पीपल की दातुन करने से दांत मजबूत होते हैं, और दांतों में दर्द की समस्या समाप्त हो जाती है। इसके अलावा 10 ग्राम पीपल की छाल, कत्था और 2 ग्राम काली मिर्च को बारीक पीसकर बनाए गए मंजन का प्रयोग करने से भी दांतों की सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।Image result for दांतों के लिए

त्वचा रोग

त्वचा पर होने वाली समस्याओं जैसे दाद, खाज, खुजली में पीपल के कोमल पत्तों को खाने या इसका काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है। इसके अलावा फोड़े-फुंसी जैसी समस्या होने पर पीपल की छाल का घिसकर लगाने से फायदा होता है।

तनाव करे कम

पीपल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, इसके कोमल पत्तों को नियमित रूप से चबाने पर तनाव में कमी होती है, और बढ़ती उम्र का असर भी कम होता है।Image result for तनाव करे कम

फटी एड़ि‍यां

एड़ि‍यों के फटने की समस्या में भी पीपल आपकी काफी मदद करेगा। फटी हुई एड़ियों पर पीपल के पत्‍तों का दूध निकालकर लगाने से कुछ ही दिनों फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं और तालु नरम पड़ जाते हैं।Image result for फटी एड़ि‍यां

पाचन में सुधा
क्या आपने कभी सोचा है कि भोजन के बाद सौंफ एक मुख्य खाद्य पदार्थ क्यों है? बहरहाल, ऐसा इसलिए है क्योंकि इलायची की प्रकृति वातहर है और यह पाचन को बढ़ाने, पेट की सूजन को कम करने, हृदय की जलन को दूर करने और मतली को रोकने में मदद करती है। माना जाता है कि यह श्लेष्मा झिल्ली को शांत करती है ताकि वह ठीक से कार्य कर सकें और जिससे अंततः एसिडिटी और पेट की खराबी के लक्षणों से राहत मिलती है। इसके अलावा, आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार यह पेट में जल और वायु के गुणों को कम करती है जिससे वह भोजन को कुशलता से पचाने में सक्षम होता है।Image result for पाचन में सुधा

मुंह की दुर्गंध को समाप्त करना

यदि आपके मुंह से दुर्गंध आती है और आप उपचार की हर कोशिश कर चुके हैं तो एकबार इलायची आज़माइए। इस मसाले में एंटीबैक्टीरियल गुण, तेज स्वाद और एक भीनी सी महक हैं। इसके अलावा, यह आपके पाचन तंत्र को सुधारती है- जो कि दुर्गंध के प्रमुख कारणों में एक है- यह समस्या के मूल कारण को दूर करने में बहुत प्रभावशाली है।

आपके हृदय रेट को नियमित करनाImage result for मुंह की दुर्गंध
– पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों से भरपूर इलायची आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए एक सोने की खान है। पोटैशियम आपके रक्त, शरीर के तरल पदार्थ और कोशिकाओं का एक मुख्य तत्व है। इन आवश्यक खनिजों की प्रचुर मात्रा में आपूर्ति करके इलायची आपके हृदय रेट को नियमित करने में मदद करता है और आपके रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।

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