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चिरयौवन चटनी 80 की उम्र में भी रहोगे बांके जवान जैसे मतवाले

चिरयौवन चटनी….

दोस्तों हमारें खान पान में पिछले दो या तीन दशकों में खासे बदलाव आए है। ऐसे में उचित खानपान नही मिल पाने के कारण बीमारियां हमें तेजी से जकड़ रही है। कहा जाता है कि जिस घर में नीम का पेड़ होता था वहां बीमारिया प्रवेश भी नही करती थी।

 

 

खानें में जब से दिखावा होनें लगा प्राकृतिक और सेहतमंद चीजें हमसे दूर हो गई और दिखावटी और हानिकारण खाद्य प्रदार्थ हम सेवन करने लगें। आज हम आपकों उस खास चिरयौवन चटनी के बारे में बता रहे है जिसें महर्षि विल्लप जैसे मुनि खाने के दौरान सेवन करते थे। और सैकड़ों साल तक निरोगी रहते थे।

चिरयौवन चटनी बनाने की साम्रगी :-

नीम की 4 बिलकुल पीली कोपल, मीठे नीम की पत्तिया लगभग 100 ग्राम, पौदीना-100 ग्राम, 4 लोंग, 10 कालीमिर्च, एक करेला, दो मीठे सेब, तेजपत्ता 20 ग्राम, गरम मसाला स्वादानुसार, सेंधा नमक स्वादानुसार, 20 ग्राम अजवाईन, 20 ग्राम जीरा, 20 पत्तें तुलसा, एक फुट लम्बी नीम गिलोय यदि नीम की नही मिले तो सामान्य गिलोय भी ले सकते है। थोडा सा घी यदि गाय का मिले तो बेहतर होगा।

चिरयौवन चटनी बनाने की विधि :-

इस चटनी को बनाने के लिए पहले थोडें से घी में मीठे नीम और नीम की पत्ती को तल लेगें उसके बाद मिक्सर में पौधिना करेला और सेब को पीस लगें इसमें लोंग,कालीमिर्च और जीरा और गिलाय आदि को भी साथ में पीस लेगें।

इसके बाद बचे हुए घी में अजवाईन और तेजपत्ता डालकर थोडा गर्म करेगें और मिक्सर में पीसा हुआ पूरा पेस्ट मिला देगे उसके बाद जो नीम की पत्ती तली थी उसे भी डाल देगें ठंडा होनें के बाद स्वादानुसार नमक और गर्म मसाला मिला लेगे।

तुलसा जी की पत्ती को छोटा-छोटा काटकर उपर से डाल दीजिए। खाने में इस प्रकार की चटनी को शमिल कीजिए फिर देखिए किस प्रकार से सेहतमंद रहकर आप भी निरोगी रह सकते है।

 

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