Breaking News

चुटकी भर गुग्गुल पानी मे मिलाकर पीने से गठिया, जोड़ो का दर्द, सायटिका, कमर दर्द, मोटापा, लकवा, ट्यूमर और शारीरिक कमजोरी आदि 35 रोगों में रामबाण है

 

गुग्गुल एक प्रकार की ऐसी औषधि है जो राजस्थान में अधिक मात्रा में पाई जाती है यह पूरे भारत में पाई जाती है। वैसे आबू पर्वत पर पैदा होने वाला गुग्गुल अच्छा सबसे अच्छा माना जाता है। इसको हिन्दी, मराठी, गुजराती, कन्नड़ में गुग्गुल, तेलगू में महिषाक्षी और अंग्रेजी में इण्डियन बेदेलियम आदि नामो से जाना जाता है। गुग्गुल काले और लाल रंग का होता है। इसका स्वाद कड़ुवा होता है। गुग्गुल का पेड़ रेतीली और पर्वतीय भूमि में पाया जाता है। इसके पत्ते छोटे-छोटे नीम के पत्तों के समान तथा फूल बिल्कुल छोटे-छोटे पांच पंखुड़ी वाले होते हैं। इसके फल छोटे-छोटे बेर के समान तीन धार वाला होता है जिसे गुलिया कहा जाता है। इसके फल पेट दर्द को दूर करने में लाभकारी है। गुग्गुल की प्रकृति गर्म होती है। यदि आपको इसके सभी गुणों का फायदा लेना है तो सुबह-सुबह एक गिलास पानी मे चुटकी भर गुग्गुल डालकर सेवन करना चाहिए।Image result for गुग्गुल
गुग्गुल के फूल लाल रंग के छोटे, पंचदल युक्त होते हैं। पेड़ से डालियों से जो गोंद निकलता है, उसे गुग्गुल कहते हैं। इसमें रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के गुण पाये जाते हैं जिसके फलस्वरूप रोग ठीक हो जाते हैं।Related image
गुग्गुल तीसरे दर्जे का गर्म प्रकृति वाला एवं सूखा फल होता है। यह वायु को नष्ट करने वाला, सूजन को दूर करने वाला, दर्द को नष्ट करने वाला, पथरी, बवासीर , पुरानी खांसी , फेफड़ों की सूजन, विष को दूर करने वाला, काम की शक्ति बढ़ाने वाला, टिटनेस, दमा , जोड़ों का दर्द तथा जिगर के रोग आदि प्रकार के रोगों को ठीक करने वाला होता है।Image result for गुग्गुल
गुग्गुल का रासायनिक विश्लेषण करने पर पता चलता है कि गुग्गुल में सुगंधित तेल 1.45 प्रतिशत, गोंद 32 प्रतिशत और ग्लियोरेजिन, सिलिका, कैल्शियम , मैग्नीशियम तथा लोहा आदि भी इसमें कुछ मात्रा में पाये जाते हैं। यह रक्तशोधन करके सारे शरीर में उत्तेजना उत्पन्न करता है। गुग्गुल में रक्त (खून) के श्वेत कणों को बढ़ाने का विशेष गुण होतो है जिसके कारण से यह गंडमाला रोग में बहुत लाभकारी है। श्वेत रक्तकण हमारी शरीर में रोग खत्म करने की शक्ति को बढ़ाती है जिसके फलस्वरूप कई प्रकार के रोग नहीं होते हैं। इसकी 2 से 4 ग्राम की मात्रा में गुग्गुल का सेवन कर सकते हैं।Image result for गुग्गुल
गुग्गुल के 35 अद्भुत फायदे
गठिया और जोड़ों का दर्द : गुग्गुल और सोंठ का चूर्ण समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और इसे घी में मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को जोड़ों पर लगानें से आराम मिलता है। 3 ग्राम शुद्ध की हुई गुग्गुल को 10 ग्राम घी और 3 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से जोड़ा के दर्द से आराम मिलता है। 240 से 960 मिलीग्राम की मात्रा में गुग्गुल को शिलाजीत के साथ मिलाकर दिन में 2 से 3 सेवन करें इससे गठिया के दर्द में आराम मिलता है। 10 ग्राम गुग्गुल लेकर इसे 20 ग्राम गुड़ में मिलाकर पीसकर इसकी छोटी-छोटी गोलिया बना लें। सुबह-शाम कुछ दिनों तक 1-1 गोली घी के साथ लेने से घुटने का दर्द दूर हो जाता है।Image result for गुग्गुल
सायटिका : 50 ग्राम गुग्गुल में 10 ग्राम लहसुन और 25 ग्राम घी मिलाकर मटर के दानों के बराबर की गोलियां बना लें। 1-1 गोली जल के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से गृध्रसी या सायाटिका में लाभ मिलता है।
कमर के दर्द में : गुग्गुल, गिलोय, हरड़ के बक्कल, बहेड़े के छिलके और गुठली सहित सूखे आंवले इन सबको 50-50 ग्राम लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में से आधा चम्मच चूर्ण 1 चम्मच अरण्डी के तेल के साथ रोजाना सेवन करें। इसे लगभग 20 दिन तक सेवन करने से कमर दर्द ठीक हो जाता है। गुग्गुल को पानी में उबालकर गाढ़ा लेप बनाए और इससे कमर पर मालिश करें इससे लाभ मिलेगा। 3 ग्राम शुद्ध गुग्गुल की गुठली निकालें और उसे 1 छुआरे में रख दें फिर इसके ऊपर गीले आटे का लेप कर दें। इसके बाद इसे गर्म राख में रख कर भून लें और इसे पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें और छाया में रखकर सुखा लें। इसमें से 1 गोली सुबह-शाम साफ साफ पानी के साथ लेने से कमर दर्द ठीक हो जाता है। गुगल को पानी में उबालकर लेप बना लें और इस लेप को कमर पर लगाए इससे कमर दर्द ठीक हो जाता है।Image result for गुग्गुल
सिर दर्द : गुग्गुल को पान के साथ पीसकर मस्तक (माथे) पर दिन में 2-3 बार लेप करने से सिर दर्द खत्म होता है। पानी में गुग्गल को पीसकर माथे पर लगाने से सिर का दर्द खत्म हो जाता है।
हिचकी : गुग्गुल को जल में घिसकर लेप बना लें। इस लेप को नाभि पर लगाने से हिचकी दूर हो जाती है।Image result for गुग्गुल
गंजापन : गुग्गुल को सिरके में घोटकर सुबह-शाम नियमित रूप से सिर पर गंजेपन वाले स्थान पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा।
सूजन: किसी भी अंगों पर आई सूजन को दूर करने के लिए गुग्गुल को गर्म पानी में घिसकर लेप बना लें इसको दिन में 2-3 बार कुछ दिनों तक नियमित रूप से सूजन वाले स्थान पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा।Image result for गुग्गुल
बवासीर : गुग्गुल को जल में घिसकर लेप बना लें। इस लेप को बवासीर के मस्सों पर लगाने से लाभ मिलता है। शुद्ध गुग्गल 5 ग्राम, एलुआ 10 ग्राम तथा रसौत 10 ग्राम इन सब को थोड़े-से मुली के रस में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। प्रतिदिन इसमें से 1-1 गोली सुबह-शाम ताजे पानी के साथ 20 दिन तक खाने से कब्ज खत्म दूर होती है तथा इसके साथ ही बवासीर रोग भी ठीक हो जाता है। 3 ग्राम शुद्ध गुग्गुल को गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने दस्त साफ आता है तथा कब्ज की शिकायत भी खत्म हो जाती है जिसके फलस्वरूप बवासीर नष्ट हो जाता है।Image result for गुग्गुल
अम्लपित्त (खट्टी डकारें आना): 1 चम्मच गुग्गुल का चूर्ण 1 कप पानी में गलाकर 1 घंटे बाद छान लें। भोजन के बाद दोनों समय इस गुग्गुल का सेवन करने से अम्लपित्त से छुटकारा मिल जाता है।
दाढ़ में दर्द : गुग्गुल को पानी में घिसकर दाढ़ पर लगाने से दाढ़ का दर्द ठीक हो जाता है।
सर्दी से होने वाले दर्द: गुग्गुल और सोंठ को एक साथ घिसकर शरीर पर लेप करके सेंकाई करने से लाभ मिलता है।Related image
ब्रोंकाइटिस : गुग्गुल 240 से 960 मिलीग्राम की मात्रा को लेकर गुड़ के साथ 2-3 बार सेवन करने से वायु प्रणाली शोथ (ब्रोंकाइटिस) में लाभ मिलता है।
फेफड़े संबन्धी रोग: गुग्गुल 0.24 से 0.96 ग्राम की मात्रा को गुड़ के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन करने से फुफ्फुस (फेफड़े) सम्बंधी अनेक रोगों में अधिक लाभ मिलता है।
दमा: दमा रोग में गुग्गुल लगभग आधा से 1 ग्राम मात्रा को सुबह-शाम दोनों समय घी के साथ सेवन करना लाभकारी होगा।Image result for गुग्गुल
खांसी: 24 से 96 मिलीग्राम गुग्गुल को छोटी पीपल, अड़ूसा, शहद और घी के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है।
दांतों में कीड़े लगना : 35 मिलीलीटर पानी में 3.50 मिलीग्रम गुग्गुल घोल लें फिर इस घोल में रुई भिंगोकर इसे दांत के गड्ढ़े रखें इससे कीड़े मरकर लार के साथ बाहर आ जाएंगे और दर्द से भी आराम मिलेगा।Image result for गुग्गुल
पायरिया (मसूढ़ों से खून बहना): गुग्गुल को 35 मिलीलीटर पानी में घोलकर लेप बना लें। इस लेप को मसूढ़ों पर मलें। इस प्रकार से प्रतिदिन कुछ दिनों तक लेप करने से पायरिया ठीक हो जाता है।
बां-झपन : गुग्गुल 0.96 ग्राम और रसौत को मक्खन के साथ मिलाकर इसमें से प्रतिदिन 3 खुराक सेवन करने से बां-झपन दूर होता है।Image result for गुग्गुल
मुंह के छाले : गुग्गुल को मुंह में रखने से या गर्म पानी में घोलकर दिन में 3 से 4 बार इससे कुल्ला व गरारे करने से मुंह के अन्दर के घाव, छाले व जलन ठीक हो जाते हैं।
दस्त: गुग्गुल 240 मिलीग्राम से लेकर 960 मिलीग्राम की मात्रा में सेवन करने से आंतों में जलन होने के कारण होने वाले दस्त ठीक हो जाता है।
मूत्ररोग: गुग्गुल 0.24 ग्राम से 0.96 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ सेवन करने से कई प्रकार के मूत्र रोग ठीक हो जाते हैं।Image result for गुग्गुल
मुंह से बदबू आना : मुंह से बदबू आने तथा सांसों से बदबू आने पर सलाई गुग्गुल 600 से 1200 मिलीग्राम को बबूल की गोंद के साथ मिलाकर सेवन करें इससे लाभ मिलेगा।
कान का दर्द: गुग्गुल और जीरे को पीसकर आग पर रखकर पका लें। पकते समय जो इसमें से धुंआ निकलता है उस धुंए को कान में लेने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।Image result for गुग्गुल
कान के कीड़े: गुग्गुल का धुंआ कान में लेने से कान के सारे कीड़े मर जाते हैं।
दस्त के साथ आंव आना : 240 से 960 मिलीग्राम गुग्गुल को इन्द्रजौ और गुड़ के साथ रोजाना सेवन करने से दस्त के साथ आंव आने की अवस्था में आराम मिलता है।
अधिक कमजोरी होना: 240-960 मिलीग्राम गुग्गुल सुबह-शाम शहद या घी के साथ सेवन करने से कमजोरी दूर हो जाती है।Image result for गुग्गुल
लकवा (पक्षाघात-फालिस फेसियल, परालिसिस): लगभग 240 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम कैशोर गुग्गुल के साथ रास्ना एवं घी सुबह और शाम को सेवन करने से लकवे में फायदा मिलता है। एरण्ड के तेल में गुग्गुल को पीसकर लेप बनाएं और पीड़ित अंगों पर कुछ हफ्तों तक नियमित मालिश करें इससे आराम मिलेगा। लगभग 100 ग्राम माल कांगनी, 5 ग्राम सिंगिया, 5 ग्राम संखिया, 10 ग्राम धतूरे के बीज, 5 ग्राम जायफल, 5 ग्राम सफेद गोमती, 500 ग्राम नारियल का तेल, 500 ग्राम अण्डी का तेल और 250 मिलीलीटर अलसी का तेल इन सभी को मिलाकर आंच पर लाल होने तक उबालें। इसके बाद इसे छानकर बोतल में भर लें। इस तेल से प्रतिदिन लकवा ग्रस्त भाग पर 4 बार मालिश करें इससे लाभ मिलता है।Related image
भगन्दर: गुग्गुल और त्रिफला का चूर्ण 10-10 ग्राम को जल के साथ पीसकर हल्का गर्म करें, इस लेप को भगन्दर पर लगाने से लाभ मिलता है। शुद्ध गुगल 50 ग्राम, त्रिफला 30 ग्राम और पीपल 15 ग्राम लेकर इसे कूट छानकर इसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें। इन गोलियों को छाया में सूखाकर लगातार 15-20 दिन तक 1-1 गोली सुबह-शाम सेवन करें। इससे भगन्दर ठीक होता है।Image result for गुग्गुल
मासिकधर्म रुक जाना : माहवारी यदि किसी गर्भाशय के दोष (विकार) के कारण रुक गई हो तो गुग्गुल 2 से 8 रत्ती (0.24 ग्राम से 0.96 ग्राम) मात्रा को एलुवा (मुसब्बर) और कसीस के साथ मिलाकर गोलियां बना लें और सुबह-शाम एक-एक गोली का सेवन करें इससे मासिकस्राव जारी हो जाता है।Image result for गुग्गुल
प्रदर रोग: 1 ग्राम गुग्गुल रोजाना रसौत के साथ 3 बार सेवन करने से प्रदर में लाभ मिलता है।
ट्यूमर : सलई गुग्गुल गर्म पानी में घिसकर सुबह-शाम गिल्टी पर बांधने से फायदा मिलता है। 600 से 1200 मिलीग्राम गुग्गुल रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से रोग में इस रोग में लाभ होता है।Image result for गुग्गुल
मोटापा: शुद्ध गुग्गुलु की 1 से 2 ग्राम को गर्म पानी के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ मिलता है और मोटापन दूर होता है। गुग्गुल, त्रिकुट, त्रिफला और काली मिर्च को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इस बने चूर्ण को अच्छी तरह एरण्ड के तेल घोटकर रख लें, इस चूर्ण को रोजाना 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मोटापापन दूर होता है।Image result for गुग्गुल
पीलिया : योगराज गुग्गुल को गोमूत्र के साथ सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
सौन्दर्य प्रसाधन: 240 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम गुग्गुल को घी के साथ लगातार सुबह और शाम सेवन करने से चेहरे पर के फोड़े-फुंसियां ठीक हो जाते हैं तथा चेहरा साफ और सुन्दर हो जाता है और चेहरे पर चमक आ जाती है।Image result for गुग्गुल
शरीर में सूजन: लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में गुग्गल और त्रिफला के चूर्ण को मिलाकर रात में हल्का गर्म पानी के साथ सेवन करने से लम्बे समय से बनी हुई कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है तथा शरीर में होने वाले सूजन भी दूर हो जाते हैं।Image result for गुग्गुल
आवश्यक सावधानीयाँ :
गुग्गुल का सेवन करने वाले रोगियों को खटाई, मिर्च, कच्चे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही संभोग क्रिया करनी चाहिए।
गुग्गुल का सेवन करने वाले रोगी को शराब, मदिरा और कोई भी नशें का पदार्थं जो वह सेवन करता हो तुरन्त ही छोड़ देना चाहिए।
इसका सेवन करने वालों को क्रोध नहीं करना चाहिए।
कई योग गुग्गुल के ऐसे भी होते हैं जिनमें नाम मात्र का भी परहेज नहीं होता है जैसे-योगराज गुग्गुल इत्यादि।Related image
गुग्गुल के हानिकारक प्रभाव :
गुग्गुल का अधिक मात्रा में सेवन करना यकृत के लिए हानिकारक हो सकता है। गुग्गुल का अधिक सेवन से कमजोरी, मूर्च्छा (बेहोशी) , अंगों में ढ़ीलापन, मुंह की सूजन तथा दस्त अधिक आने की समस्यां उत्पन्न हो सकती है। मुंह में छाले , रक्तपित्त , आंखों में जलन, उष्ण वात, पित्त से होने वाला सिरदर्द और पैर का फूल जाना आदि रोगों की अवस्था में गुग्गुल गाय के दूध का घी के साथ सावधानी पूर्वक सेवन करना चाहिए नहीं तो इससे हानि हो सकती है। गुग्गुल का सेवन काल में देर रात तक जागना और दोपहर को सोना नहीं चाहिए क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। खट्टे पदार्थ, अधिक भोजन, श्रम, धूप, मद्य और क्रोध आदि अवस्था में गुग्गुल का उपयोग करने से हानि हो सकती है। गुग्गुल के दोषों को दूर करने वाला कतीरा द्वारा गुग्गुल के गुणों को सुरक्षित रखकर इसके दोषों को दूर करता है।Image result for गुग्गुल

About admin

Check Also

मौत को छोड़ कर सभी रोगों को जड़ से खत्म कर देती है यह चीज

दक्षिण भारत में साल भर फली देने वाले पेड़ होते है. इसे सांबर में डाला …