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वज्रासन से पाचन क्रिया, कमर दर्द, घुटनों का दर्द, गठिया, सायटिका, एड़ी और गर्दन के दर्द से निजात पाने का अद्भुत उपाय है, ये 72000 नाड़ियों को ठीक करता है

वज्रासन को वीरासन भी कहते हैं। इस आसन में शरीर वज्र की तरह मजबूत व शक्तिशाली होता है, इसलिए इसे वज्रासन कहते हैं। हठयोग में इस आसन का बहुत महत्व है क्योंकि इस आसन को करने से आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। इस आसन का अभ्यास स्त्री-पुरुष दोनों समान रूप से अधिक समय तक आसनी से कर सकते हैं।Image result for  वज्रासन को वीरासन वज्रासन को भोजन करने के बाद भी किया जा सकता है। घुरण्ड ऋषि ने इसके बारे में कहा है कि जो भी इस विधि से वज्रासन को करते हैं उसका शरीर दृढ़ व शक्तिशाली बन जाता है तथा उसकी कुण्डलिनी शक्ति का विकास करने में लाभकारी होता है।Image result for  वज्रासन को वीरासन
बड़ा ही सरल और हमारे सेहत के लिए महत्वपूर्ण है , जिसे हमें अपने दिनचर्या में निश्चयरुप से सामिल कर लेनी चाहिए। इसे नित्य अभ्यास करने के लिए विशेषरुप से समय निकालने में अगर किसी भी प्रकार की परेशानिया हो रही हो तो घबड़ाने की आवश्यकता नहीं है , इसे किसी भी समय किसी भी जगह अर्थात् घर के अन्दर या बाहर या बिस्तर पर अभ्यास किया जा सकता है।Image result for  वज्रासन को वीरासन सबसे बड़ें मजे की बात तो यह है कि इसे खाली पेट या भोजनोपरान्त दोंनो ही समय में अभ्यास करनी चाहिए , सिर्फ थोड़ा सा अंतर हो जाता है- भोजनोपरान्त पेट को ढ़िला और खाली पेट में पेट को टाईट रखना चाहिए।Image result for  वज्रासन को वीरासन
इसे भोजनोपरान्त इसलिए पेट को ढ़िला रखा जाता है कि भोजन आराम से हजम हो सके, पेट को आराम मिल सके। लाभ के दिशा में सब समानरुप से है।Image result for  वज्रासन को वीरासन
इसे खाली पेट में इसलिए पेट को टाईट अर्थात् कमर , पिठ और गर्दन रखा जाता है कि इन तिनों का ही व्यायाम हो सके , बाकी रहा घुटना और एड़ी तो यह दोनों ही अवस्था में ठिक है- इसमें कुछ परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।Image result for  वज्रासन को वीरासन

वज्रासन को करने की विधि :

वज्रासन के लिए सबसे पहले चटाई पर सामान्य स्थिति में बैठ जाएं। अब अपने दायें पैर को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर ले जाएं और दायें नितम्ब के नीचे लगाएं। एड़ी को शरीर से सटाकर तथा पंजे को ऊपर की ओर रखें। इस में घुटने से पैर की अंगुलियों तक का भाग फर्श से बिल्कुल सटाकर रखें। फिर बाएं पैर को भी घुटने से मोड़कर पीछे की ओर नितम्ब से लगाएं। दोनों घुटनों को मिलाकर रखें तथा तलवों को अलग-अलग रखें।Image result for  वज्रासन को वीरासन अब अपने दोनों हाथों को तानकर घुटनों पर रखें और अपने पूरे शरीर का भार एड़ी व पंजो पर डालकर बैठ जाएं। अपने कमर, रीढ़ की हड्डी, सिर आदि को बिल्कुल सीधा व तान कर रखें। इस स्थिति में आने के बाद दृष्टि (आंखों) को नाक के अगले भाग पर टिकाकर सामान्य रूप से सांस लें और छाती को फुलाएं। वज्रासन की इस स्थिति में 10 से 15 मिनट तक रहें।Image result for  वज्रासन को वीरासन

वज्रासन से रोगों में लाभ :

इस आसन से शरीर मजबूत होता है और आयु में वृद्धि होती है। ये आसन आंखों की रोशनी को बढ़ाता है। इससे पंजों, घुटनों, पिण्डलियों, जांघों, कमर व रीढ़ को बल मिलता है। यह अतिनिद्रा को दूर कर मन को एकाग्र करता है तथा स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। यह कमर दर्द, साईटिका (गृधसी) , कटि स्तम्भ एवं पीठ के दर्द को ठीक करता है। इस आसन को करने से गठिया (आमवात) रोग से बचाव होता है।Related image भोजन करने के बाद 5 मिनट तक इस आसन को करने से नाड़ियों का प्रभाव ऊर्ध्वगामी हो जाता है। यह पाचन शक्ति को मजबूत करता है तथा भोजन को जल्द हजम करने में सहायक होता है जिससे अन्न का रस इतना शुद्ध हो जाता की हड्डियाँ व नाड़ियां सहित पूरा शरीर वज्र के समान मजबूत हो जाता है। इस आसन का नाभि पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है (जो कि 72000 नाड़ि का केन्द्र है)।
पेट की अंतड़ियों पर दबाव पड़ने से इसकी विकृति दूर होती है।Image result for  वज्रासन को वीरासन यह पेट की गैस , दर्द आदि को भी खत्म करता है। युवावस्था में इस आसन में बैठकर कंघी करने से बाल सफेद नहीं होते हैं। यह आसन पीलिया रोग ठीक करता है। इससे खून का बहाव ठीक रहता है जिससे शरीर निरोग व सुन्दर बना रहता है। इस आसन को करने से स्त्रियों के मासिकधर्म सम्बन्धी दोष दूर होते है।Related image
दोपहर व रात के भोजन के बाद इस आसन को नासिकारंध्र में प्रश्वास लेते हुए करने से भोजन आसानी से पचता है। वज्रासन में प्राणायम किया जाए तो श्वास, दमा , तपेदिक, श्वास फूलना , फेफड़े तथा छाती के अनेक रोग दूर होते हैं। इस आसन को करने से वीर्य पुष्ट होकर स्तंभन शक्ति बढ़ता है जिससे कुण्डलिनी जागरण की संभावना बढ़ती है। यह मन से कामवासना को खत्म करता है तथा मन को ब्रह्मचार्य की ओर आकर्षित करता है।

आवश्यक सावधानी :
इस आसन में मूलाधार चक्र में ध्यान लगाने व सांस लेने में सावधानी बरतें।

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